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जांच की बढ़ती आंच

छत्तीसगढ़ की नई कांग्रेस सरकार ने पूर्व के भाजपा शासनकाल में लिए गए निर्णयों की नए सिरे से जांच के आदेश देकर राजनीतिक तूफान खड़ा करने के साथ ही दो कट्टर प्रतिद्वंदियों—मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह—को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। सतर्कता एजेंसियों को छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले की पहले से चल रही जांच में कुछ पक्षों की दोबारा जांच का निर्देश देने के साथ ही पिछली सरकार के कार्यकाल में की गई खरीद और ई-निविदा की अनियमितताओं की भी जांच करने के लिए कहा गया है। घोषित रूप से राज्य में मोबाइल की पहुंच बढ़ाने की संचार क्रांति योजना के तहत मुफ्त मोबाइल फोन बांटने का मसला भी जांच के दायरे में है।
लगभग 36,000 करोड़ रु. के नागरिक आपूर्ति घोटाले में निगम के अफसरों और कर्मचारियों पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए घटिया चावल की खरीद के लिए व्यापारियों से रिश्वत लेने के आरोप हैं। पिछले साल विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान बघेल ने लोगों से यह जांच पूरी करवाने का वादा किया था। कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने 12 सदस्यीय विशेष जांच दल बनाया और मामले की जांच कर रहे ऐंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के महानिदेशक मुकेश गुप्ता को इससे अलग कर दिया।
भ्रष्टाचार-रोधी ब्यूरो ने फरवरी 2015 में निगम अधिकारियों के परिसरों पर छापेमारी करके 3 करोड़ रु. से ज्यादा की नगदी बरामद की थी। इस मामले में आइएएस अधिकारियों आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा समेत 18 अफसरों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे। अंततरू 15 अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किए गए थे। इस मामले में जांच के केंद्र में निगम के प्रबंध निदेशक टुटेजा के निजी सहायक गिरीश शर्मा से बरामद की गई एक डायरी है। कांग्रेस दावा कर रही थी कि डायरी में एक प्रविष्टि सीएम मैडम की है लेकिन इसकी जांच नहीं की गई। गुप्ता का कहना था कि वह प्रविष्टि निगम के एक कर्मचारी की पत्नी से ताल्लुक रखती थी।
विधानसभा चुनाव के बाद टुटेजा ने मुख्यमंत्री बघेल को पत्र लिखा कि भ्रष्टाचार-रोधी ब्यूरो ने मामले की ठीक से जांच नहीं की थी। साथ ही उन्होंने नए सिरे से जांच की मांग की। इसी पत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष जांच दल का गठन किया। बघेल ने बताया, विशेष जांच दल सुनिश्चित कर रहा है कि जांच प्रक्रिया में सभी पक्षों की जांच हो। ऐसा कैसे हो सकता है कि डायरी में मिले कुछ नामों पर जांच हो और कुछ दूसरे संदर्भों की जांच न हो? पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सरकार को चुनौती दी है कि वह घोटाले में उनकी संलिप्तता साबित करे। रमन सिंह ने 22 जनवरी को कहा, (नई) सरकार का संचालन एक व्यक्ति के हाथ में है। वे सभी मामलों की जांच कर लें, लेकिन वे मेरे खिलाफ कुछ भी नहीं हासिल कर पाएंगे।
ई-निविदा घोटाले में सरकार ने आर्थिक अपराध शाखा को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा था। नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में संकेत किया गया था कि रमन सिंह सरकार ने 4,601 करोड़ रुपए मूल्य की निविदाएं उसी कंप्यूटर से डाली थीं जिनसे इन निविदा प्रस्तावों को सार्वजनिक किया गया था। इससे संदेह होता है कि विभाग ने निविदाओं की जानकारी करने के बाद दूसरे बोलीकर्ताओं के साथ मिल कर षड्यंत्र किया था।
ऐसा लगता है कि जांच की गति आगे बढऩे के साथ ही बघेल कुछ और भी चौंकाने वाली बातें सामने लाएंगे। रायपुर में 25 जनवरी को उन्होंने कहा था कि मैंने अभी-अभी कुछ फाइलों पर पड़ी हुई धूल हटाई है और उनमें अनेक हंगामाखेज मामले हैं। ऐसे बहुत से मामले सामने आने वाले हैं।
खुलने लगी पोल
छत्तीसगढ़ में लंबे समय बाद सत्ता परिवरर्तन हुआ है और चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं ने रमन सिंह के राज में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया था। अब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है तो भ्रष्टाचार के मामलों की पोल खुलने लगी है। दोषियों के खिलाफ जांच भी शुरू हो गई है। लोकसभा चुनाव निकट हैं और ऐसे में उन आरोपों को सच साबित करना और उनकी जांच कराने का जिम्मा भी कांग्रेस सरकार पर है। देखें, आगे और क्या सामने आता है।
-रायपुर से टीपी सिंह