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भटकते कदम

मप्र की राजनीति में अपने आपको स्थापित करने के लिए कई नेताओं के कदम ऐसे भटके कि वे राजनीति में अलग-थलग पड़ गए। ऐसे ही भटकाव के दौर से प्रदेश के कृषि मंत्री सचिन यादव गुजर रहे हैं। दरअसल वे अपने पिता स्व. सुभाष यादव की तरह राजनीति करने का प्रयास कर रहे हैं। सुभाष यादव भी विवादास्पद राजनीति के लिए जाने जाते थे। शायद यही वजह है कि सचिन यादव भी बिना मंत्रणा के कुछ का कुछ बयान देकर सरकार की छीछालेदर करा रहे हैं।
विगत दिनों उन्होंने शिवराज सरकार में शुरु हुई भावान्तर योजना को बंद करने की घोषणा कर दी। इससे किसानों में हड़कम्प मच गया। जब यह खबर मुख्यमंत्री के विदेश दौरे तक पहुंची तो उन्होंने यादव को जमकर फटकार लगाई तब जाकर यादव अपने बयान से पलट गए। कृषि मंत्री ने पलटते हुए योजना को जारी रखने की बात कही है। गौरतलब है कि इससे पहले सीएम कमलनाथ ने कहा था कि भावांतर योजना बंद नहीं होगी और इसे नये स्वरुप में लागू किया जाएगा। लेकिन इसके पलट कृषि मंत्री सचिव यादव ने योजना को बंद करने का ऐलान कर दिया जिस पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने सरकार को योजना बंद होने पर आंदोलन की चेतावनी दे डाली। वहीं सरकार को पूरे मामले में सफाई देनी पड़ी। इससे सरकार की जमकर फजीहत भी हुई।
गौरतलब है कि प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी किसानों की सहानुभूति मिलने के बाद ही हुई है। कमलनाथ सरकार ने किसानों को अधिक से अधिक सुविधाएं देने का न केवल वादा किया है बल्कि उसका क्रियान्वयन भी कर रही है। ऐसे में कृषि मंत्री के इस कदम से सरकार की साख पर सवाल खड़े हो गए थे।
दरअसल पिछली भाजपा सरकार में जब मंदसौर में किसानों पर गोली चलाई गई थी उसके बाद पूरे प्रदेश में कांग्रेस और किसानों ने व्यापक आंदोलन चलाया था तब माना जा रहा था कि इस बार किसान भाजपा सरकार से रुष्ट हो गया है तब किसानों को मनाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भावांतर योजना लेकर आए थे लेकिन इस योजना में तब भी मीन-मैख निकाले गए लेकिन जैसे-तैसे यह योजना चलती रही।
कई किसानों के खातों में पैसे भी आते रहे तो कई अभी भी इंतजार कर रहे हैं लेकिन जैसे ही प्रदेश में सरकार बन गई वैसे ही भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं की समीक्षाएं होने लगीं और कुछ योजनाओं को बंद करने की बात भी सामने आने लगी। ऐसा ही भावांतर योजना को लेकर हो रहा है। बहरहाल भावांतर योजना को लेकर नया विवाद उस समय शुरू हुआ जब कृषि मंत्री सचिन यादव ने अपने पहले बयान में कहा कि भावांतर योजना शुरू से ही विवादों में रही है और इससे किसानों को कोई लाभ होता दिखाई नहीं दे रहा है।
अत: सरकार इस योजना को बंद करने जा रही है लेकिन यादव के बयान पर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं आई और पार्टी हाईकमान ने जो भी निर्देश यादव को दिए हों, एक घंटे बाद यादव ने कहा कि हम भावांतर योजना की समीक्षा करेंगे और इसमें जो खामियां हैं उन्हें दूर करके नए सिरे से इसे लागू करने पर विचार करेंगे। इसके कुछ दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव भी भावांतर योजना को बंद करने का अंदेशा जता चुके थे। चौहान ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र भी लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदेश सरकार यदि किसानों की उपज का वाजिब मूल्य देने से बचती है और भावांतर योजना को बंद करती है तो यह त्रासदी ही होगी और ऐसे में किसानों को उनकी राशि का भुगतान कराने के लिए मुझे आंदोलन पर बाध्य होना पड़ेगा। आखिरकार मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जैसे-तैसे बिगड़े माहौल को संभाल लिया है, लेकिन कृषि मंत्री लगातार अजब-गजब बयान देकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।
– राजेश बोरकर