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ये कैसे तबादले?

विधानसभा चुनाव के दौरान कमलनाथ सहित कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का रूख मप्र की नौकरशाही प्रति जैसा दिखा, उससे यही लगा था कि सत्ता में आते ही कांग्रेस पूरे घर को बदल डालेगी। लेकिन सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनकी सरकार के तेवर ही बदल गए हैं। सरकार ने अब तक कोई ऐसा तबादला नहीं किया है जिस पर उसकी पीठ थपथपाई जाए। ऐसा लग रहा है कि सरकार डर-डर कर तबादले कर रही है। आखिर यह डर किस बात का है? यह सवाल आज खुद कांग्रेसी उठा
रहे है।
दरअसल, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार ने एक सिरे से सारे अफसरों को बदल डाला है। इससे वहां कि जनता में संदेश गया है कि सरकार ने जनता की परेशानी को देखते हुए ऐसा कदम उठाया है। यही नहीं वहां कांग्रेस मंत्रियों, विधायकों और पदाधिकारियों की सलाह पर अफसरों के तबादले किए गए हैं। इससे वहां के कांग्रेसियों में उत्साह दिख रहा है। वहीं मप्र में सरकार तबादलों को लेकर फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है। लगता है मप्र में मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। भाजपा सरकार में जो अफसर रसूखदार पदों पर थे वे आज भी बने हुए हैं। सरकार ने अब तक जो तबादले किए है, उसे देखकर खुद कांग्रेसी भी आश्चर्यचकित हैं। अकेले जनवरी माह में ही तबादले के कुल 17 आदेश जारी हुए। इसमें आईएएस अफसरों के थोकबंद तबादले भी हुए। लेकिन उनमें से अधिकांश प्रशासनिक थे। इसीलिए उन तबादलों को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में भी कई बार चर्चा हो चुकी है। यही नहीं सरकार और संगठन के पास कई तरह की चिट्ठियां भी पहुंच रही हैं। इन चिट्ठियों में भाजपा शासनकाल से जमे अफसरों के नहीं बदले जाने पर सवाल खड़े किए गए हैं।
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के दौरान कमलनाथ ने कई सभाओं में कहा था कि फूल छाप और दागदार अफसरों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन सरकार बनते ही शायद वे अपने इस कथन को भूल गए हैं। तभी तो सजा के नाम पर अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव और पवन शर्मा के अलावा किसी अन्य अधिकारी को नहीं बदला गया है। बाकी जो तबादले हुए हैं वह सब प्रशासनिक हैं। इसी तरह पुलिस के भी तबादले तो किए गए पर देखने में आया है कि अधिकतर दोबारा अपनी जगह पर काबिज हो गए हैं।
जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ को अधिकारियों से ज्यादा अपने लोगों पर भरोसा है। इसलिए सीएम ने अपनी खास टीम तैयार की है। इस टीम में शामिल सीएम के खास लोग सरकार के कामकाज और विकास कार्यों के लिए रणनीति तैयार करेंगे। सीएम सचिवालय में अब तक तीन व्यक्तियों को नियुक्त किया गया है। नाथ के विश्वासपात्र, जिनमें संजय श्रीवास्तव, आरके मिगलानी, सलाहकार के रूप में, जबकि प्रवीण कक्कड़ और भूपेंद्र गुप्ता को अधिकारी-विशेष-ड्यूटी (ओएसडी) बनाया गया है। लेकिन कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की मंशा है कि सरकार फूल छाप अफसरों को किनारे करे।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बने डेढ़ महीना हो गया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस बात का एहसास करवा दिया है कि वह किसी काम में कौताही बदाश्त नहीं करेंगे। अंदरखाने की खबर है कि बीती सरकार में जो अफसर काम कर रहे थे वह अब कमलनाथ के साथ काम करने में असहज महसूस कर रहे हैं। सीएम मंत्रालय में अफसरों के साथ सुबह 11 बजे से लेकर रात 10 बजे तक काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के इतने लंबे समय तक मंत्रालय में रुकने और काम करने से अफसर परेशान हैं। उन्हें भी मंत्रालय में देर रात तक रुकना पड़ रहा है। सीएम सचिवालय के अफसर घर पर लंच करने जाने में असमर्थ हैं। कई अफसर जो पहले जल्दी घर चले जाया करते थे वह अब बैठकों और कामकाज की वजह से मंत्रालय में ही अटके रहते हैं। इससे उनमें नाराजगी है।
-कुमार राजेंद्र