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लैंड रिकॉर्ड की पड़ताल

मप्र का राजस्व विभाग हाईटेक हो चुका है। साथ ही घोटालेबाज भी। तभी तो आम गरीब अनपढ़ किसानों के साथ-साथ सरकार को भी हजारों एकड़ जमीन की चपत लगाई जा चुकी है। राजस्व की जितनी भी शिकायतें आई हैं, उनमें ज्यादातर धोखाधड़ी की है। किसी ने सरकारी अफसरों के साथ मिलीभगत कर जमीन पर बेजां कब्जा कर लिया। कई जगह कब्जा नहीं किया, लेकिन रिकार्ड में व्यापक गड़बडिय़ां साफ झलक रही हैं। इन गड़बडिय़ों के मामले सामने आने के बाद सरकार ने घोटालेबाजों की पड़ताल शुरू करवा दी है।
बेव जीआईएस साफ्टवेयर के जरिए फर्जी एंट्री कर सरकारी जमीनों को निजी लोगों के नाम होने की शिकायत के बाद एसटीएफ लैंड रिकार्ड खंगालने लगी है। माना जा रहा है कि इस जांच के बाद कई शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के साथ फर्जीवाड़े में शामिल हितग्राहियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है। दरअसल लैंड रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर फर्जी जमीन दर्ज करने के मामले भोपाल, ग्वालियर और मुरैना समेत कई जिलों में भी सामने आए हैं। मामले का खुलासा एसटीएफ द्वारा नरसिंहपुर, गाडरवाड़ा में की गई जांच से हुआ। इसमें फर्जी जमीन घोटाले में दो तत्कालीन तहसीलदार और नौ हितग्राहियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। जिसमें फर्जी जमीनों की ऋण पुस्तिका पर बैंकों से करीब 50 लाख रुपए का लोन लेना बताया गया है। प्रारंभिक जांच के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि इस फर्जीवाड़े में बैंक अफसर और राजस्व अधिकारी भी शामिल हैं।
यह घोटाला 2009-2010 में भू अभिलेखों के कंप्यूटरीकरण के दौरान किया गया था। लैंड रिकॉर्ड में ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए थे जो किसान नहीं थे। इनके खातों में खसरा नंबर दर्ज कर जमीन भी चढ़ा दी गई थी। इस मामले में एसटीएफ ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एसटीएफ के मुताबिक अभी भोपाल, ग्वालियर और मुरैना के लैंड रिकॉर्ड में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आई है। रिकॉर्ड का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है। जल्द ही आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। यह गड़बड़ी लॉगिन पासवर्ड निचले स्तर के अधिकारियों तक के हाथ में पहुंचने के कारण हुई है। एसटीएफ वेब जीआईएस सॉफ्टवेयर की भी जांच कर रही है।
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले साल मुरार तहसीलदार अनिल राघव के लॉगिन आईडी से करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन निजी लोगों के नाम चढ़ा दी गई थी। इसके बाद तहसीलदार अनिल राघव ने मुरार थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर भी कराई थी। इस प्रकरण के सामने आने के बाद कलेक्टर डॉ. संजय गोयल ने सभी एसडीएम को अपने-अपने क्षेत्रों में हुई एंट्रियों की जांच कराई थी। इस पूरी जांच-पड़ताल में ऐसी 68 फर्जी एंट्रियों के प्रकरण सामने आए थे, लेकिन जांच-पड़ताल के बाद इस मामले में प्रशासन यह पता नहीं कर पाया कि यह फर्जी एंट्रियां हो कैसे गईं। लिहाजा तहसील कार्यालयों में बैठा सरकारी अमला और सॉफ्टवेयर कंपनी के कर्मचारियों पर फर्जी एंट्री करने के आरोप लगे थे, लेकिन प्रशासन इन आरोपों की पुष्टि कर पाने में नाकाम रहा था। इस प्रकार की गड़बड़ी वेब जीआईएस सॉफ्टवेयर में भी सामने आई हैं। लैंड रिकार्ड संधारित करने वाले साफ्टवेयर बेवजीआईएस में व्याप्त गड़बडिय़ों को देखते हुए प्रदेश के कई जिला कलेक्टरों ने इसके स्थान पर एनआईसी के साफ्टवेयर के उपयोग की अनुमति मांगी थी। इससे पहले पटवारी से लेकर एसडीएम तक इसकी कमियों को देखते हुए अपना विरोध दर्ज करा रहे थे। लिहाजा इसको देखते हुए बीते दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसे बंद करने के निर्देश दे चुके थे।
प्रदेश में सरकारी जमीनों में हेराफेरी का गोरखधंधा पिछले एक दशक से जमकर चल रहा है। कांग्रेस विधायक डॉ. गोविंद सिंह का कहना है कि प्रदेश में सरकार खुद जमीनों का गोरखधंधा करवा रही है। इसे लेकर विधानसभा में भी जमकर हंगामा हो चुका है। सागर में खुरई रोड पर पट्टे की 500-600 करोड़ रुपए की 27 एकड़ जमीन मात्र 35 करोड़ में बेचे जाने, सतना में राजस्व विभाग के अधिकारी व पटवारियों ने भू-माफियाओं के साथ मिलकर 16 सौ एकड़ सरकारी जमीन का घोटाला करने, अशोकनगर व अन्य जगहों की जमीन के मामलों को उठाते हुए कांग्रेस सरकार ने राजस्व बोर्ड के अधिकार अपने हाथ में लेने और बोर्ड के जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई करने की मांग कर चुकी है। कांग्रेस का आरोप है कि भू-माफियों को राजस्व बोर्ड में संरक्षण दिया जा रहा है। अपील करने का राजस्व में सिस्टम है, लेकिन लोग सीधे राजस्व बोर्ड चले जाते हैं और वो सुनवाई करके फैसला भी सुना देता है। डॉ. गोविंद सिंह का कहना है कि प्रदेश में सरकारी जमीनों को सरकार के संरक्षण में कब्जाया जा रहा है। अब मामले की पड़ताल एसटीएफ कर रहा है। जिससे उम्मीद है कि घपलेबाजों तक जल्द पहुंचा जा सकता है।
आधुनिकीकरण से घोटाला
देश में 80 के दशक में कंप्यूटर आने से कई समस्या हल हो गई। वर्ष 1985 में राज्य राजस्व मंत्रियों की बैठक हुई और उसमें लिए गए निर्णयों के अनुरूप केंद्र द्वारा प्रायोजित दो योजनाएं- राजस्व प्रशासन को मजबूत करना एवं भू-अभिलेखों को अद्यतन बनाना (एसआरए एवं यूएलआर) तथा भू-अभिलेखों का कंप्यूटरीकरण (सीएलआर) शुरू किया गया। जानकारों के अनुसार, भू-अभिलेखों के आधुनिकीकरण ने जमीन घोटालों को आसान बना दिया है। इस बात का खुलासा मप्र में वेब जीआईएस सॉफ्टवेयर के लागू होने के बाद हुई गड़बडिय़ों से हुआ है। दरअसल, राजस्व अभिलेखों के संधारण और अपडेशन के लिए निर्मित वेब जीआईएस तकनीक में कई सारी तकनीकी खामियां थीं।
-विकास दुबे