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अवसरवादी एकता

जनता परिवार के नेताओं और कांग्रेस के दुर्दिन चल रहे हैं इसीलिए यह सब एक मंच पर आने को आतुर हैं। जहां बुरा समय बीता वहां इनकी गर्राहट फिर शुरू हो जाएगी क्योंकि एक होने के पीछे मकसद सत्ता है। सैद्धांतिक दृष्टि से सभी एक-दूसरे के विरोधी रहे हैं। बिहार, उत्तरप्रदेश में राजनीतिक स्थिरता की जरूरत है। इसलिए जनता परिवार का यह प्रयोग कहीं असफल न हो जाए। इन पार्टियों के भीतर भी यह नया कदम असंतोष को जन्म दे सकता है।
द्यरामनरेश, रीवा

धारा 370 हटे

कश्मीर में धारा 370 हटानी चाहिए। हिमाचल सहित कुछ राज्यों को अन्य धाराओं के अंतर्गत विशेष प्रावधान दिए गए हैं, वे कश्मीर में भी दिए जा सकते हैं। जहां तक कश्मीरी पंडितों का प्रश्न है, उन्हेें जिन्होंने खदेड़ा है उनके अंदर जब तक इंसानियत नहीं जागेगी तब तक कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास केवल कागजों पर होता रहेगा। अभी तो कश्मीर के सुन्नी मुसलमान यह गलतफहमी पाल बैठे हैं कि कश्मीर केवल उन्हीं का है, किसी दूसरे का कोई हक नहीं है। इसी कारण कश्मीर संकीर्ण राजनीतिक दलदल में फंस गया है। जहां तक कश्मीर के कुल 5 जिलों के 10-15 प्रतिशत अलगाववादियों की मांग का प्रश्न है, उन्हें माकूल जवाब तभी दिया जा सकता है जब शेष भारत से कश्मीर का संवाद स्थापित किया जाए। आज सारे मुस्लिम देशों में आग लगी हुई है।

वह आजादी का सपना नहीं देख रहा बल्कि उसे भी यह अहसास है कि धारा-370 खत्म कर दी जानी चाहिए।

  • कार्तिक कौल, जबलपुर

 

बचने की जरूरत

अत्याधुनिक तकनीक का जितना फायदा है उतना ही नुकसान भी है। खुफिया कैमरे जैसे छोटे-छोटे गैजेट्स स्त्रियों की निजता से खिलवाड़ कर रहे हैं। वे कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। घर के भीतर और बाहर जासूसी हो सकती है, उनकी फिल्म बनाई जा सकती है, फोटो उतारे जा सकते हैं। इंटरनेट पर ऐसे लाखों क्लिपिंग्स और फोटो उपलब्ध हैं जो स्त्रियों की सहमति के बगैर चोरी से खींचकर डाले गए हैं। तांक-झांक के लिए बने कानून लचर हैं, जो कि प्रभावी नहीं हैं। इसीलिए आए दिन इस तरह की घटनाएं सुनाई पड़ती हैं।

  • रमेश प्रजापति, ग्वालियर

जासूसी क्यों जरूरी?

जासूसी का जंजाल बहुत पुराना है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार की जासूसी से पहले भी कई लोगों की जासूसी की गई और अभी तक जासूसी की जा रही है। जासूसी के बगैर सरकारों का काम नहीं चलता। अब तो क्रिकेट जगत में भी जासूसी होने लगी है। लेकिन यह जासूसी क्यों जरूरी है? किसी दुश्मन की जासूसी की तुक तो समझ में आती है, अपने ही देश में अपने ही लोगों की जासूसी करने का क्या मकसद हो सकता है?

  • चंद्रावती ताम्रकार, छिंदवाड़ा

राजनीति न हो

नशा देश की गंभीर समस्या है। हर वर्ष लाखों युवा नशे की चपेट में आ रहे हैं। सिगरेट और तम्बाकू अकाल मौत का सबसे बड़ा कारण है। देश की तम्बाकू लॉबी यही प्रयास कर रही है कि किसी भी तरह युवा वर्ग इस नशे की चपेट में आ जाए। सरकार 10 हजार करोड़ रुपए के तम्बाकू उत्पाद से जितना कमाती है उससे कई गुना ज्यादा तो तम्बाकू जनित बीमारियों पर सरकार की जेब से खर्च हो जाता है। इसलिए तम्बाकू की तरफदारी करना समझ से परे है। जिन लोगों ने तम्बाकू की पैरवी की है, उन्हें संसदीय समिति से तुरंत बाहर किया जाना चाहिए।

  • चंद्रेश पंत, दिल्ली

धर्म के नजरिए से ना देखें
जनसंख्या वृद्धि को धार्मिक नजरिए से ना देखें, इसे एक राष्ट्र की गंभीर समस्या समझकर त्वरित उपाय किए जाने चाहिए। चाहे हिंदू बढ़ें या मुसलमान, जनसंख्या वृद्धि अंतत: देश के लिए ही खतरनाक है। देश के संसाधनों पर बहुत भार है, जनसंख्या बढऩे से वही संसाधन चरमरा जाएंगे। सरकार को एक कठोर जनसंख्या नीति बनानी चाहिए।

  • फिरोज कुरैशी, सागर

सराहनीय प्रयास
एक तरफ भारत है जिसने युद्धग्रस्त यमन से हजारों पीडि़तों को सुरक्षित निकालकर मानवता की मिसाल कायम की है और एक तरफ पाकिस्तान है, जिसने मानवता के दुश्मन लखवी जैसे आतंकवादियों को रिहा करके सारे विश्व की चिंता बढ़ा दी है। भारत ने दुनिया को राहत दिलाई और पाकिस्तान ने दुनिया का चैन छीन लिया। लखवी की रिहाई पाकिस्तान को महंगी पड़ेगी क्योंकि उसकी अपनी जमीन पर ही आतंकी युद्ध प्रारंभ हो जाएगा।

  • मनीष गुप्ता, इंदौर

एक हो सुरक्षा बल
रेलवे की सुरक्षा बेडमिंटन के गेम की तरह एक पाले से दूसरे पाले में शटलकॉक डालने के समान नहीं है। रेलवे की सुरक्षा गंंभीर मसला है। लेकिन राज्य सरकारें इस सुरक्षा में सेंध लगाने वाले आतंकवादियों को शह दे रही हैं क्योंकि वे इन अपराधियों को पकडऩे के लिए सारे देश का एक केंद्रीयकृत सुरक्षा बल गठित करने में नाकाम रही हैं। जब तक एक सुरक्षा बल नहीं होगा, रेलवे अपराधियों के लिए स्वर्ग बना रहेगा।

  • मोहित शर्मा, मुंबई