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सत्कर्म की राह दिखाती भागवत गीता

श्रीमद्भागवत गीता सिर्फ ग्रंथ नहीं जिसे सिर्फ सहेज कर रखा जाए, बल्कि इसके अध्ययन से माया मोह का त्याग होता

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समस्याओं का अच्छा समाधान है रामचरित मानस में

गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस की चौपाइयां केवल शब्द नहीं है। इनके नित जीवन में प्रयोग से आपके कई कार्य सिद्ध

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हर सवाल का जवाब देती है गीता

कहते हैं गीता सारे सवालों का जवाब है। आखिर क्यों। क्योंकि यह सिर्फ ग्रंथ नहीं, संपूर्ण जीवनशैली है। सोने-जागने, खाने-पीने

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एक पल में बदल जाएगा जीवन

श्रीमद्भागवद् गीता अर्जुन के अलावा धृतराष्ट्र एवं संजय ने सुनी थी। अर्जुन से पहले गीता का परम पावन ज्ञान श्रीहरि

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समाज का मार्गदर्शक है रामचरितमानस

रामचरितमानस मनुष्य के अशांत मन को शांत कर उसमें सदविचार पैदा करने का सशक्त माध्यम है। इसमें जीवन से मुक्ति

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तमसो मा ज्योतिर्गमय।

असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥ अर्थात् इस प्रार्थना में अंधकार से प्रकाश

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निर्भय कन्या का शक्ति पर्व नवरात्रि

शक्ति उपासना या नवरात्रि में हम देवी भगवती के रूप में एक नारी शक्ति को साकार रूप देते हैं। देवी

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रामचरितमानस में मूल्यों का चित्रण

आर्यावर्त से इंडिया तक की यात्रा में आर्यावर्त के परम पूज्य पुण्यधाम के प्रतीक श्रीराम का स्मरण मात्र भी सुख

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रामचरितमानस की मनोवैज्ञानिकता

हिन्दी साहित्य का सर्वमान्य एवं सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य रामचरितमानस मानव संसार के साहित्य के सर्वश्रेष्ठ ग्रंथों एवं महाकाव्यों में से एक

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अहंकार प्रभु से दूर ले जाता है

भगवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि… प्रकृते: क्रियमाणानि गुणै: कर्माणि सर्वश:। अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते।। यानी जीवात्मा अहंकार के

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ईश्वर: परम: कृष्ण: सच्चिदानन्द: विग्रह:,

हृदय में ज्ञान उदय होने के बाद ब्रह्म संहिता में ब्रह्मा जी कहते है… ईश्वर: परम: कृष्ण: सच्चिदानन्द: विग्रह:, अनादिरादि 

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दुखों का मूल केवल कर्मफल

भगवान कृष्ण कहते हैं : सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत। यानी सहज-स्वाभाविक कर्म दोषमुक्त होने पर भी नहीं त्यागना

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अपने को गिराओ नहीं!

भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद भगवद्गीता में कहा है… उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत। आत्मैव ह्यात्मनो बंधुरात्मैव रिपुरात्मन:।। यानी शारीरिक अस्वस्थता में मन

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कौतुक देखि चले गुर पाहीं

गोस्वामी तुलसीदास का रामचरितमानस मर्यादा का महाकाव्य है और उसके महानायक हैं श्रीराम। वे मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और महाकाव्य के

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‘भक्ति का अर्थ है अनीति से लडऩा

सद्गुरुभक्ति योग में अर्जुन ने पूछा, ‘जो भक्त आपके प्रेम में डूबे रहकर आपके सगुण रूप की पूजा करते हैं,

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सावन के महीने में शिव नहीं राम पूजा का भी महत्व

सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा तो महत्वपूर्ण है ही साथ ही सावन के महीने में भगवान राम

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भगवदगीता ज्ञान और विज्ञान भी

पाश्चात्य जगत में विश्व साहित्य का कोई भी ग्रंथ इतना अधिक उद्धरित नहीं हुआ है जितना भगवद्गीता। भगवद्गीता ज्ञान का

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भगवत गीता केवल अर्जुन को ही क्यों सुनाई दी?

महाभारत युद्ध में जान और माल का भारी नुकसान हुआ। इसे विश्व का सबसे बड़ा और पहला विश्व युद्ध माना

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भगवान कृष्ण क्यों बने थे अर्जुन के सारथी

पीतांबरधारी चक्रधर भगवान कृष्ण महाभारत युद्ध में सारथी की भूमिका में थे। उन्होंने अपनी यह भूमिका स्वयं चयन की थी।

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सुंदरकांड हनुमान की विजय का गान है

श्रीरामचिरतमानस की प्रत्येक चौपाइयों को जीवन में उतारना अत्यंत फलदाई है। यह जीवन को एक उचित दिशा देती हैं। तुलसीदास

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अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष की साधना है गीता

मनुष्य को मानवता सिखाने वाली सब धर्मों का सारभूत ग्रंथ, सभी समस्याओं का समाधान, अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष की साधना

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महाभारत के महानायक हैं भगवान श्रीकृष्ण…

म्हाभारत का नायक भले ही अर्जुन हैं लेकिन महानायक तो भगवान श्रीकृष्ण ही हैं। क्योंकि श्रीकृष्ण ने न केवल पांडवों

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