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बंग-जंग

दिल्ली के दांव पर दीदी की चाल के चर्चे सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि पूरा देश कर रहा है।

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कहां से वसूलेंगे 700 करोड़ रुपए?

मप्र की व्यावसायिक राजधानी इंदौर को अफसरों का स्वर्ग माना जाता है, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्य सचिव

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सूखे के पैकेज से बनी मंडियां और गोदाम

बुंदेलखंड पैकेज से भले ही वहां के निवासियों का भला नहीं हुआ, लेकिन अधिकारियों और ठेकेदारों की तकदीर जरूर बदल

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जलता प.बंगाल

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर दंगे की आग भड़क उठी है। सूबे के उत्तरी परगना जिले के बसिरहाट परिक्षेत्र

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ताजपोशी के मायने

उत्तराखण्ड में भाजपा ने स्थापित नेताओं को दरकिनार कर त्रिवेंद्र रावत को कमान सौंपी है। इसके स्पष्ट संकेत हैं कि

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अवैध खनन से बेजार बुंदेलखंड

बुंदेलखंड यानी शोषण, अवैध खनन, माफिया, डकैतों, रसूखदारों, नेताओं और अफसरों द्वारा सताए गए लोगों की भूमि। इस बुंदेलखंड की

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100 करोड़ की वक्फ संपत्ति पर रसूखदारों का कब्जा

सूबे में फैली अरबों की वक्फ प्रॉपर्टी को रसूखदारों द्वारा कैसे हड़पा जा रहा है इसका नजारा बुरहानपुर में सामने

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साख पर सवाल

महाराष्ट्र में भाजपा की साख लगातार गिरती जा रही है। प्रदेश में भाजपा के मंत्रियों पर जितने आरोप लगे हैं

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पांच अरब की शराब गटक जाते हैं बुंदेलखंड के लोग

बुंदेलखंड भयानक सूखे के दौर से गुजर रहा है। अकाल जैसे हालात हैं। बूंद-बूंद पानी के लिए मारामारी मची है।

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‘भूखे बुंदेलखंडÓ में अनाज की लूट

सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड में लोग भूख से इतने बेहाल होने लगे हैं कि अब वे अनाज भी लूटने लगे हैं। ऐसी एक नहीं करीब दर्जनभर घटनाएं सामने आईं हैं। पिछले दिनों बांदा जिले में हुई ऐसी ही एक घटना में लोगों ने सार्वजनिक

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विदर्भ कब तक सहेगा अन्याय

कर्ज माफी अगर किसानों को आत्महत्या से रुक जाती तो, अब तक किसी किसान की आत्महत्या की खबर नहीं आती। दरअसल, कर्ज माफी किसानों की समस्याओं का हल नहीं है और न ही किसी सरकार ने किसानों की असली परेशानी

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पत्थरों की मंडी में किसान नीलाम

जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर पहरा ग्राम पंचायत का व्यास कुंड ऐसा स्थान है जिसके जल स्त्रोत पूरे साल कुंड में पानी बनाए रखते थे। आसपास के गांव वाले भी कुंड के पानी से ही गुजर बसर करते लेकिन सूखे की विभीषिका

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बंगाल में ममता भी बिहार फॉर्मूले पर!

2011 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी, कांग्रेस गठबंधन के बूते ही सत्ता हासिल कर पाईं। चुनाव के साल भर बाद तक कांग्रेस के साथ उनका रिश्ता भी कायम रहा लेकिन फिर पूरी तरह टूट भी गया। 9 दिसंबर को ममता, सोनिया से

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किसान कर रहे आत्महत्या, गांव खाली..!

पिछले डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय से बुंदेलखंड के किसान आत्महत्या और सर्वाधिक जल संकट से जूझ रहे हैं। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल वर्ष 2003 से मार्च 2015 तक 3280 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। सूखे की भीषण मार

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पश्चिम बंगाल में भी बंगाली बनाम बाहरी मुद्दा बनेगा?

भाजपा की जीत के रथ पर सवार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को रोकने के लिए बिहार में नीतिश कुमार और लालू प्रसाद यादव की जोड़ी ने बिहार बनाम बाहरी का जो मुद्दा उछाला था उसी का परिणाम है

फाइलों से निकल कर जमीन तक नहीं पहुंचा पानी !

बुंदेलखंड पैकेज अफसरों और नेताओं के लिए ऐसा कमाऊ पैकेज बना कि इन्होंने योजनाओं को कागजों पर तो तैयार कर लिया लेकिन वे जमीन पर नहीं उतर सकीं। इसका परिणाम यह हो रहा है कि

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250 से 1500 करोड़ पहुंच गई परियोजना, काम कुछ नहीं

बुंदेलखंड को पानी-पानी करने के लिए बरसों के प्रयास भी नाकाफी हैं। 1982 में जलसंसाधन विभाग ने 258 करोड़ की लागत से क्षेत्र को जल संपन्न बनाने के लिए बड़ी योजना तैयार की, लेकिन यह

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मराठवाड़ा में सूखे के जिम्मेदार चीनी मिल मालिक

महाराष्ट्र में मराठवाड़ा के तीन जिले भीषण सूखे के चपेट में है। इस साल जनवरी से अब तक बीड, उस्मानाबाद और लातूर के 400 से ज्यादा किसान मौत को गले लगा चुके हैं। सूखाग्रस्त जिलों में

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पुरातत्व में इतिहास भी, भविष्य भी

पुरातत्व में ऐतिहासिक मानव बसाहट या समाज का अध्ययन किया जाता है। ऐतिहासिक जगहों के सर्वेक्षण, खुदाई से निकले अवशेष जैसे बर्तन, हथियार, गहने, रोजमर्रा की चीजें, पेड़-पौधे, जानवर व

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इनकी प्रतिभा से ही दूर होगी गरीबी

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से अपने भाषण में गरीब-गरीबी पर चिंता क्या जता दी, लोग इसकी भी आलोचना पर उतर गए। यह तो हद है। आलोचक कह रहे हैं कि मोदी जी ने

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शोषित बुंदेलखंड में अब कुपोषण से जंग

वीरों की धरती बुंदेलखंड आज ऐसा क्षेत्र बन गया है जिसे अभिशाप की नजर से देखा जाता है। केंद्र और राज्य सरकार ने यहां के निवासियों के उत्थान के लिए हजारों करोड़ रूपए का बजट जारी

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वैश्यावृत्ति की वैधता का सवाल?

जब समाज पाखंड से लड़ता है तो कई ऐसे पड़ाव आते हैं, जब सत्ता के समक्ष अनिर्णय की स्थिति पैदा हो जाती है। कुछ ऐसा ही पेचीदा यक्ष प्रश्न केंद्र में सत्तासीन भाजपानीत सरकार के समक्ष

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छगन और पंकजा का धनबल

जब मुंबई शहर बारिश से तरबतर हो रहा था और शहर के ही एक कोने में कुछ घंटों पूर्व अवैध शराब ने 94 जानों की बलि ले ली थी, उस वक्त महाराष्ट्र के सबसे ताकतवर राजनीतिज्ञों में से एक छगन

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तसल्ली देती व्यंग्य रचनाएं

विनोद सेमवाल को एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में जानता पहचानता रहा हूं किंतु उनके भीतर एक व्यंग्यकार भी छिपा है। इसका परिचय पहले नहीं था। कारण स्पष्ट है कि जिस व्यवस्था से जुड़े

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क्यों हताश है महाराष्ट्र का किसान?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फणनवीस के लिए गोमांस और वीआईपी की सिक्युरिटी से बड़ी चिंता किसानों की आत्महत्या के रूप में सामने है। भले ही उन्होंने फिल्म स्टार्स से लेकर राजनेताओं तक

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आतंकवादियों को मुंह तोड़ जवाब

20-25 या 150 संख्या मायने नहीं रखती। जज्बा मायने रखता है। मणिपुर में जब सेना की टुकड़ी पर हमला करके भारतीय सैनिकों को आतंकवादियों ने कू्ररतापूर्वक मार गिराया था, तब सभी को

tamiladu2

तमिलनाडु को फिर मिलीं अम्मा

तमिलनाडु की अनाथ राजनीति को अम्मा जयराम जयललिता का आश्रय मिल गया है। सितम्बर में आय से अधिक मामले में कोर्ट के निर्णय के बाद सलाखों के पीछे पहुंची जयललिता को जमानत

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